अब जेनेरिक दवा की जगह अगर लिखी महंगी दवा तो चिकि


देहरादून : सरकारी अस्पतालों में उपचार के लिए पहुंच रहे मरीजों को बाहर से दवा खरीदने को मजबूर होना पड़ रहा है। वह भी तब जब जिलाधिकारी से लेकर मुख्य चिकित्साधिकारी और अस्पतालों के प्रमुख चिकित्साधिकारी कई मर्तबा डॉक्टरों को निर्देशित कर चुके हैं कि मरीजों को बाहर की दवा न लिखी जाए।

बावजूद इसके कई डॉक्टर बाज नहीं आ रहे हैं। मरीजों का यह भी आरोप है कि डॉक्टर ओपीडी पर्चे पर जेनेरिक दवा लिखने के बजाय निजी मेडिकल स्टोर में मिलने वाली दवा लिख रहे हैं। 

मरीजों से यह शिकायत मिलने पर जिला अस्पताल (राजकीय कोरोनेशन अस्पताल व गांधी शताब्दी नेत्र चिकित्सालय) के प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक डॉ. मनोज उप्रेती ने सभी चिकित्सकों को निर्देश जारी किए हैं।

कहा है कि अस्पताल की ओपीडी व आइपीडी में इलाज के लिए पहुंचने वाले मरीजों की पर्ची पर जेनेरिक दवा का नाम कैपिटल लेटर में साफ-साफ लिखा जाए, जिससे मरीजों और उनके तीमारदारों को किसी तरह की परेशानियों का सामना न करना पड़े।

आदेश का पालन नहीं करने वाले चिकित्सकों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। बता दें कि दून मेडिकल कॉलेज चिकित्सालय, कोरोनेशन अस्पताल आदि में जेनेरिक दवा के स्टोर भी हैं।

जहां पर मरीजों को सस्ती दरों पर जेनेरिक दवा उपलब्ध है। लेकिन, अधिकांश डॉक्टर मरीजों के पर्चे पर जेनेरिक के बजाय बाहर की महंगी ब्रांडेड दवा लिखते हैं। इसका प्रभाव उन मरीजों पर ज्यादा पड़ता है जो कि आर्थिक रूप से कमजोर होते हैं।

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